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प्रीत लगे चोर,बचा ले प्रेम रीत

Posted On: 9 Oct, 2017  
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कविता में

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आपको अब क्या कहना…

Posted On: 3 Oct, 2017  
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कविता में

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सदी अब कह रही….

Posted On: 7 Sep, 2017  
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कविता में

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सामाजिक फ़लक पर तीन तलाक़ ‘लॉक’

Posted On: 24 Aug, 2017  
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social issues में

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दुनिया में नहीं दूसरा हिंदुस्तान

Posted On: 16 Aug, 2017  
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Special Days में

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रस्मों की ओट

Posted On: 10 Aug, 2017  
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social issues में

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मन की बात -हिन्द की औकात

Posted On: 18 Oct, 2016  
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Hindi Sahitya Infotainment Junction Forum Social Issues में

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एक ने कहा - हम १५ लाख खातों में जमा करा देंगे- खाता तो खोलो. सबने कहते खुलवा लिए रही सही घर पूंजी सरकार को चढ़ा गए. तभी दूसरे ने कहा- हमारे पास पैसे नहीं हैं भाई पर तुम्हारे झुग्गी के ऊपर पक्का घर बना के देंगे बात समझ में आई? घर हो जाएगा पक्का तो वोट भी हुआ पक्का यह था नवसिखुआ नेता जिसने किया वादा हम लाएंगे युग त्रेता. अब जुदा हुए लोगों की हुई फिर से मिताई जो भी मिलेगी माया मिल बांटकर खाएंगे भाया तभी एक क्षेत्रीय दल में चेतना जागी, शहर के बीचो बीच उसने टेंट लगा दी वाह टेंट भी क्या शानदार स्वर्ग से सुन्दर लगे इसके अंदर का घर बार! बेचारे गरीब बनवासी देखकर चकराए स्वर्ग भी क्या इससे सुन्दर होता है? इन्हे समझ न आए बड़े सरदार ने अपने लम्बे बाल लहराए, मूछों पर दिया ताव इस बार पूरे प्रदेश को हम ऐसा ही बनाएंगे मुझे जिताओ हम वन प्रदेश को भी स्वर्ग से सुन्दर बनाएंगे सादर! आपकी पंक्तियाँ पढ़ मुझे भी कुछ ख्याल आया इसे मैंने आपको बताया!

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