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प्रपात के बीच आपातासन

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राष्ट्र में राजनैतिक स्वरूप के नए आगाज ने कई दिग्गजों के बने बनाय खेल को तहस नहस कर दिया है .हालत यहां तक आ चुका है की दिग्गज अपने पद प्रतिष्ठा के साथ विवेक भी खोते लगने लगें है . अब सत्ताधारी दल के पितामह को देखें तो उन्हें अब आपातकाल के दिनों की याद इतनी चढ़ बैठी की आपातकाल की आशंका दिल पर छा गई दिखती है .जबकि आपातकाल के दिनों में जद्दोजहद करने वाले योगासन द्वारा दिल दिमाग में नई ताजगी भी भरने में लग रहे है .तब भोर की लालिमा में सूर्यास्त का भरम मार्गदर्शन तो हरगिज नहीं करेगा बल्कि प्रपात के स्वच्छ धार से घायल होने का भय जता कर अनुपम राष्ट्र की योजना के साकार रूप को प्राकृतिक आपदा घोषित किया जा रहा है . उन्नींदे आखों से न तो वर्तमान दिखता है ना ही भविष्य .सिर्फ भूतकाल का दुःस्वप्न आतंकित और आशंकित करता ही है .हिन्दुस्तान में प्रचलित है की ” खाली दिमाग शैतान का घर ” . ऐसे में संयुक्त राष्ट्र संघ ने अंतराष्ट्रीय योग दिवस की मान्यता से साबित कर दिया की आज योगाभ्यास की जरुरत समूचे विश्व को है .योग ही वह माध्यम है जो मानव को स्वस्थ जीवन देता है , जिससे बच्चे ,महिलायें एव बुजुर्ग भी साकारात्मक शैली पाने लगे है. भारत ने योग को आधार दिया अवश्य है परन्तु ” चिराग तले अन्धेरा ” भी चरितार्थ है . अब समय वह नहीं रहा की आदिवासी प्रदेशों में जय जय कहके राम की मर्यादा को प्रचारित kaa bhrm करें और वनों में स्वस्थ योग का आसान करें .ना ही हांथी की तरह चिंघाड़ के योग के लिए नाउम्मिदो की फौज जुटे जिसमे हाथी सफ़ेद शक्कर लिए भूखी चीटियों को सेना समझता hai वहीँ सियार माफिक हुआकार को चीटियाँ चिंघाड़ मानलें. तब vaastviktaa hetu योग को रक्षक व् पथप्रदर्शक समझ लेना और भी आवश्यक हो गया है .————amit shashwat

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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Shobha के द्वारा
June 20, 2015

श्री अमित जी आडवाणी जी क्या कहना चाहते थे समझ नहीं आया वह पुराने सांसद है अच्छी तरह जानते हैं आपत्कालीन घोषणा करना आसान नहीं हैं अच्छे विचार

amitshashwat के द्वारा
June 21, 2015

ji, sahi kahaa aapne ,bayanon me spasta n hone se batangad hoti hai .aapke anubhavi pratikriya ke liye bahut dhanyvad .

rajanidurgesh के द्वारा
June 22, 2015

अमितजी अच्छा उद्गार है. हमें पसंद आया.

amitshashwat के द्वारा
June 22, 2015

ji,dhanyvad.


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