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तुलसी बाबा की याद

Posted On: 24 Aug, 2015  
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एक ने कहा - हम १५ लाख खातों में जमा करा देंगे- खाता तो खोलो. सबने कहते खुलवा लिए रही सही घर पूंजी सरकार को चढ़ा गए. तभी दूसरे ने कहा- हमारे पास पैसे नहीं हैं भाई पर तुम्हारे झुग्गी के ऊपर पक्का घर बना के देंगे बात समझ में आई? घर हो जाएगा पक्का तो वोट भी हुआ पक्का यह था नवसिखुआ नेता जिसने किया वादा हम लाएंगे युग त्रेता. अब जुदा हुए लोगों की हुई फिर से मिताई जो भी मिलेगी माया मिल बांटकर खाएंगे भाया तभी एक क्षेत्रीय दल में चेतना जागी, शहर के बीचो बीच उसने टेंट लगा दी वाह टेंट भी क्या शानदार स्वर्ग से सुन्दर लगे इसके अंदर का घर बार! बेचारे गरीब बनवासी देखकर चकराए स्वर्ग भी क्या इससे सुन्दर होता है? इन्हे समझ न आए बड़े सरदार ने अपने लम्बे बाल लहराए, मूछों पर दिया ताव इस बार पूरे प्रदेश को हम ऐसा ही बनाएंगे मुझे जिताओ हम वन प्रदेश को भी स्वर्ग से सुन्दर बनाएंगे सादर! आपकी पंक्तियाँ पढ़ मुझे भी कुछ ख्याल आया इसे मैंने आपको बताया!

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